मथुरा पुलिस की ऐतिहासिक जीत: दलित बच्ची से दुष्कर्म-हत्या मामले में दोषी को मृत्युदंड
मथुरा, 4 सितम्बर 2025। उत्तर प्रदेश पुलिस ने एक बार फिर यह साबित कर दिया कि जघन्य अपराध करने वाले अपराधियों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा। मथुरा जनपद में वर्ष 2020 में हुई दलित बच्ची के साथ दुष्कर्म और हत्या की वारदात ने पूरे प्रदेश को हिला कर रख दिया था। करीब पाँच साल तक चली सघन विवेचना और अभियोजन शाखा की कड़ी पैरवी के बाद अब अदालत ने इस मामले के मुख्य आरोपी को मृत्युदंड और ₹3.20 लाख का अर्थदंड सुनाया है। इस फैसले को न्यायपालिका और पुलिस की साझा जीत माना जा रहा है।
घटना की पूरी कहानी
यह मामला 26 नवम्बर 2020 का है। मथुरा के एक गांव में रहने वाली पांच वर्षीय मासूम बच्ची अचानक घर से लापता हो गई थी। परिवार ने पहले तो उसे आसपास तलाश किया, लेकिन कोई सुराग नहीं मिला। जब देर रात तक बच्ची घर नहीं लौटी तो परिजनों ने पुलिस को सूचना दी।
पुलिस की सक्रियता से रातभर तलाश अभियान चलाया गया और अगले दिन गांव के ही खेत से बच्ची का शव बरामद हुआ। शव की हालत देखकर स्पष्ट हो गया कि बच्ची के साथ पहले दुष्कर्म किया गया और फिर गला दबाकर हत्या कर दी गई। इस वारदात ने न सिर्फ परिवार, बल्कि पूरे इलाके को दहला दिया।
विवेचना और सुबूत जुटाने की चुनौती
मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने इसे चुनौती के तौर पर लिया। फोरेंसिक टीम को बुलाया गया और घटनास्थल से DNA सैंपल, कपड़े, मिट्टी और अन्य वैज्ञानिक साक्ष्य एकत्र किए गए। बच्ची का पोस्टमार्टम कराया गया, जिसमें दुष्कर्म और हत्या की पुष्टि हुई।
आरोपी को शक के आधार पर पकड़ा गया और जांच के दौरान उसके खिलाफ पुख्ता सुबूत मिले। DNA रिपोर्ट ने आरोपी की पहचान पुख्ता कर दी। पुलिस ने सभी गवाहों के बयान दर्ज किए और चार्जशीट दाखिल कर दी।
अभियोजन की मजबूत पैरवी
केस की सुनवाई डिस्ट्रिक्ट सेशंस कोर्ट में चली। अभियोजन पक्ष ने पूरे केस को बेहद मजबूती से रखा। पुलिस द्वारा जुटाए गए वैज्ञानिक साक्ष्य, DNA रिपोर्ट और गवाहों के बयान आरोपी को अपराध से जोड़ने में निर्णायक साबित हुए।
पुलिस और अभियोजन ने यह सुनिश्चित किया कि कोर्ट में कोई भी तकनीकी कमी न रहे। हर तारीख पर केस की पैरवी की गई। नतीजा यह रहा कि अदालत ने आरोपी को सबसे कठोर सजा सुनाई।
अदालत का फैसला
सुनवाई पूरी होने के बाद अदालत ने आरोपी को दोषी मानते हुए मृत्युदंड की सजा सुनाई। साथ ही आरोपी पर ₹3.20 लाख का अर्थदंड भी लगाया गया। अदालत ने कहा कि यह अपराध न केवल पीड़िता और उसके परिवार के खिलाफ था, बल्कि पूरे समाज के लिए चुनौती था। ऐसे अपराधों में कठोरतम सजा ही न्याय है।
पीड़ित परिवार की प्रतिक्रिया
फैसले के बाद पीड़ित परिवार ने कहा कि उन्हें पांच साल बाद न्याय मिला है। हालांकि उनकी बच्ची अब कभी वापस नहीं आ सकती, लेकिन अदालत का यह फैसला अपराधियों के लिए सख्त संदेश है। परिवार ने पुलिस और अभियोजन की मेहनत की सराहना की।
पुलिस की प्रतिक्रिया
मथुरा पुलिस अधिकारियों ने इसे #OperationConviction के तहत एक बड़ी उपलब्धि बताया। वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक ने कहा कि इस केस में पुलिस ने पूरी निष्ठा से काम किया। वैज्ञानिक तरीके से साक्ष्य जुटाना और अभियोजन के साथ समन्वय बनाकर मजबूत पैरवी करना इस सफलता की कुंजी रहा।
समाज पर असर
यह फैसला समाज में एक बड़ा संदेश लेकर आया है। बच्चियों और महिलाओं के खिलाफ होने वाले अपराधों को लेकर लोगों में गुस्सा और असुरक्षा की भावना बढ़ती जा रही थी। अदालत द्वारा सुनाया गया यह कठोर फैसला अपराधियों को चेतावनी देता है कि ऐसे अपराधों का परिणाम बेहद गंभीर होगा।
कानून और न्याय व्यवस्था की मिसाल
इस केस को तेजी से न्याय दिलाने की मिसाल भी कहा जा रहा है। आमतौर पर ऐसे मामलों में लंबा समय लगता है, लेकिन पुलिस और अभियोजन की तत्परता ने सुनिश्चित किया कि दोषी को समय पर सजा मिले।
निष्कर्ष
मथुरा की इस घटना ने पूरे प्रदेश को हिला दिया था। लेकिन अब इस फैसले से साफ है कि कानून की पकड़ बेहद मजबूत है और अपराध करने वालों को किसी भी सूरत में छोड़ा नहीं जाएगा। यह फैसला न केवल पीड़ित परिवार के लिए न्याय है बल्कि समाज को भी यह भरोसा दिलाता है कि पुलिस और न्यायपालिका मिलकर न्याय सुनिश्चित करने के लिए कटिबद्ध है।
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