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"क्या सोमवार को चांदी में 25,000 रुपये का बड़ा क्रैश आएगा? जानिए पूरी सच्चाई"

क्या सोमवार यानी कि कल चांदी में 25,000 रुपये का क्रैश आएगा?

भाई, चांदी का बाजार इन दिनों पूरे देश में चर्चा का विषय बना हुआ है। व्यापारी हों, निवेशक हों या फिर आम कारीगर – हर किसी के मन में एक ही सवाल घूम रहा है कि क्या सोमवार को चांदी में 25,000 रुपये की भारी गिरावट देखने को मिलेगी? सोशल मीडिया, व्हाट्सएप ग्रुप और बाजार की गलियों में डर की बातें ज्यादा हैं, लेकिन सच्चाई को समझना बहुत जरूरी है।


चांदी कोई शेयर नहीं है जो एक अफवाह पर आधी हो जाए। यह एक फिजिकल मेटल है, जिसका इस्तेमाल गहनों से लेकर इंडस्ट्री और निवेश तक हर जगह होता है। इसलिए इसमें गिरावट और तेजी दोनों आती हैं, लेकिन हर मूव के पीछे वजह होती है।

25,000 रुपये का क्रैश सुनने में बड़ा क्यों लगता है?

अगर हम सीधे आंकड़ों की बात करें, तो एक ही दिन में 25,000 रुपये का क्रैश चांदी जैसे मजबूत मेटल में बहुत बड़ी बात मानी जाती है। इतनी बड़ी गिरावट तभी आती है जब बाजार में कोई असाधारण घटना घटे। जैसे कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर युद्ध की खबर, अमेरिका से कोई बहुत बड़ा आर्थिक फैसला, या फिर किसी बड़े बैंक या बुलियन फंड की जबरदस्त जबरन बिकवाली।

नॉर्मल हालात में चांदी धीरे-धीरे ऊपर-नीचे होती है। दिनभर की ट्रेडिंग में हजारों रुपये का उतार-चढ़ाव आम बात है, लेकिन 25,000 रुपये का सीधा झटका रोज नहीं लगता।

अभी बाजार में डर का माहौल क्यों बना है?

डर की सबसे बड़ी वजह यह है कि पिछले कुछ दिनों में चांदी पहले ही कमजोर दिखी है। ऊपर के भाव पर खरीदने वाले कई लोग फंस चुके हैं। जब भाव नीचे आता है तो रिटेल ट्रेडर घबरा जाता है और जल्दबाजी में बिकवाली करता है। यही डर धीरे-धीरे अफवाह में बदल जाता है।

इसके अलावा कुछ तकनीकी कारण भी हैं। MCX पर ओपन इंटरेस्ट में उतार-चढ़ाव, ग्लोबल मार्केट में डॉलर की मजबूती, और मुनाफावसूली – इन सबका असर चांदी पर पड़ता है। लेकिन इन कारणों से सीधा 25,000 का क्रैश होना जरूरी नहीं है।

सोमवार को गिरावट आ सकती है या नहीं?

सच बात यह है कि गिरावट की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। बाजार कमजोर है, माहौल नेगेटिव है और ट्रेडर्स सतर्क हैं। ऐसे में अगर सोमवार को दबाव बनता है तो 5,000 से 10,000 रुपये तक की गिरावट देखना कोई हैरानी की बात नहीं होगी।

अगर कोई बहुत खराब खबर आई, जैसे ग्लोबल लेवल पर बड़ा झटका, तो गिरावट 12,000 से 15,000 तक भी जा सकती है। लेकिन बिना किसी ठोस वजह के 25,000 रुपये का क्रैश एक एक्सट्रीम स्थिति मानी जाएगी।

बड़े खिलाड़ी क्या कर रहे हैं?

बाजार में हमेशा दो तरह के लोग होते हैं – डरने वाले और मौके तलाशने वाले। बड़े खिलाड़ी अक्सर डरने वालों की भीड़ में नहीं होते। वे गिरावट के समय धीरे-धीरे निचले स्तरों पर माल उठाते हैं।

अगर सच में बाजार को पूरी तरह तोड़ना होता, तो पहले ही बहुत बड़ी बिकवाली दिख जाती। लेकिन अभी जो हो रहा है, वह ज्यादा तर डर और अफवाह से पैदा हुआ दबाव लग रहा है।

कारीगर और छोटे निवेशक क्या करें?

कारीगरों के लिए चांदी सिर्फ भाव नहीं, रोजी-रोटी भी है। ऐसे में घबराकर फैसला लेना नुकसान कर सकता है। अगर जरूरत का माल है, तो धीरे-धीरे खरीदारी करें। पूरा दांव एक ही भाव पर न लगाएं।

निवेशकों के लिए भी यही सलाह है कि अफवाहों से दूर रहें। बाजार को समझें, धैर्य रखें और लॉन्ग टर्म सोचें। चांदी हमेशा से उतार-चढ़ाव के बाद संभलती आई है।

आगे क्या संकेत मिलते हैं?

अगर सोमवार को तेज गिरावट आती है, तो वह डर की गिरावट मानी जाएगी। ऐसी गिरावट के बाद अक्सर टेक्निकल बाउंस देखने को मिलता है। अगर बड़ी गिरावट नहीं आती, तो इसका मतलब होगा कि बाजार ने नीचे का सपोर्ट पकड़ लिया है।

देसी निष्कर्ष

सीधी भाषा में कहें तो 25,000 रुपये के क्रैश की बातें फिलहाल ज्यादा अफवाह पर आधारित नजर आती हैं। गिरावट संभव है, लेकिन सीमित दायरे में। घबराहट में लिया गया फैसला अक्सर नुकसान देता है।

चांदी लंबी दौड़ का खेल है। यह रोज टूटने या उड़ने वाली चीज नहीं है। समझदारी, धैर्य और सही समय ही इस बाजार में असली हथियार हैं।

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Shivam Soni
Shivam Soni
Founder, Shivam90.in | Desi Digital Journalist

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