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चांदी के नकली गहनों पर लगाम लगाने की तैयारी, BIS का बड़ा प्लान क्या है?

रिपोर्ट: Shivam90.in | अपडेट: अगस्त 2026
चांदी खरीदने वालों और कारोबारियों के लिए बड़ी खबर है। भारतीय मानक ब्यूरो (BIS) चांदी की ज्वेलरी और दूसरी चांदी की वस्तुओं की हॉलमार्किंग व्यवस्था को और मजबूत करने पर काम कर रहा है। खास बात यह है कि BIS भविष्य में चांदी की हॉलमार्किंग को अनिवार्य बनाने के लिए नियम, टेस्टिंग क्षमता और पूरे सिस्टम की तैयारी का अध्ययन कर रहा है। लेकिन अभी इसे पूरे देश में अनिवार्य कर दिया गया है—ऐसा कहना सही नहीं होगा।
BIS Silver Hallmarking HUID और चांदी की नई प्योरिटी ग्रेड
सबसे जरूरी अपडेट: 4 जून 2026 को BIS के महानिदेशक संजय गर्ग के हवाले से सामने आई जानकारी के मुताबिक चांदी की हॉलमार्किंग को भविष्य में चरणबद्ध तरीके से अनिवार्य बनाने पर काम चल रहा है। अभी सिल्वर हॉलमार्किंग की मूल योजना स्वैच्छिक है। सितंबर 2025 से जिस चांदी के आर्टिकल पर हॉलमार्किंग की जाती है, उस पर HUID व्यवस्था लागू की गई है।

मामला आखिर है क्या?

सोने की तरह चांदी में भी शुद्धता को लेकर ग्राहक अक्सर दुकानदार की बात पर भरोसा करता है। चांदी के भाव बढ़ने के साथ कम शुद्धता वाली या गलत तरीके से पहचान बताकर बेची जाने वाली वस्तुओं से ग्राहक को नुकसान हो सकता है। इसी वजह से BIS चांदी की टेस्टिंग और हॉलमार्किंग व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।

4 जून 2026 की PTI रिपोर्टों में BIS महानिदेशक संजय गर्ग ने बताया कि संस्था चांदी की हॉलमार्किंग को अनिवार्य बनाने से पहले regulatory framework, infrastructure और implementation process का अध्ययन कर रही है। उन्होंने यह भी कहा कि चांदी का बाजार सोने के मुकाबले ज्यादा विविध है, इसलिए व्यवस्था को धीरे-धीरे लागू किया जाएगा।

अभी चांदी की हॉलमार्किंग अनिवार्य है या नहीं?

अभी पूरे देश में चांदी की हॉलमार्किंग अनिवार्य नहीं है। यही इस खबर का सबसे जरूरी हिस्सा है। BIS ने 2026 में अनिवार्य सिल्वर हॉलमार्किंग की तैयारी का अध्ययन करने की बात कही है, लेकिन 4 जून 2026 तक इसकी कोई निश्चित nationwide implementation date घोषित नहीं हुई थी।

इसलिए सोशल मीडिया पर अगर यह लिखा मिले कि “अब हर चांदी के गहने पर तुरंत BIS हॉलमार्क जरूरी हो गया है”, तो उसे बिना आधिकारिक आदेश के सही नहीं मानना चाहिए।

HUID ने क्या बदला?

सितंबर 2025 से BIS के revised silver standard IS 2112:2025 के तहत hallmarked silver jewellery और articles के लिए HUID आधारित व्यवस्था शुरू हुई। यहां एक जरूरी फर्क समझिए—हॉलमार्किंग स्वैच्छिक हो सकती है, लेकिन जो चांदी का आर्टिकल हॉलमार्क कराया जाता है, उस पर HUID लगाना अनिवार्य है।

HUID यानी Hallmarking Unique Identification एक यूनिक कोड है, जिसके जरिए hallmarked article की जानकारी को डिजिटल तरीके से ट्रेस किया जा सकता है। BIS की जानकारी के अनुसार ग्राहक BIS CARE App के जरिए उपलब्ध HUID verification सुविधा का इस्तेमाल कर सकता है।

नई सिल्वर प्योरिटी ग्रेड में क्या बदलाव आया?

नए IS 2112:2025 standard में चांदी के लिए सात fineness grades दिए गए हैं:

प्योरिटी ग्रेड मतलब
80080.0% चांदी
83583.5% चांदी
92592.5% चांदी
95895.8% चांदी
97097.0% चांदी
99099.0% चांदी
99999.9% चांदी

ध्यान देने वाली बात: 958 और 999 ग्रेड नए standard में जोड़े गए हैं, जबकि 900 grade को revised standard में हटा दिया गया है।

टेस्टिंग लैब क्यों बढ़ानी पड़ सकती हैं?

अगर भविष्य में देशभर में चांदी की हॉलमार्किंग को बड़े पैमाने पर अनिवार्य किया जाता है तो टेस्टिंग और हॉलमार्किंग सेंटरों की क्षमता बढ़ाना जरूरी होगा। BIS के अक्टूबर 2025 के आधिकारिक newsletter के मुताबिक उस समय करीब 230 Assaying & Hallmarking Centres (AHCs) चांदी की ज्वेलरी की जांच के लिए मान्यता प्राप्त थे और ये करीब 87 जिलों में फैले थे।

यही वजह है कि आने वाले समय में infrastructure बढ़ाने की जरूरत दिखाई देती है। हालांकि वायरल पोस्ट में बताए गए “अगले दो साल में निश्चित संख्या में लैब बढ़ाने” के आंकड़े की मुझे BIS की उपलब्ध आधिकारिक सामग्री में पुष्टि नहीं मिली है। इसलिए इस हिस्से को पक्की सरकारी घोषणा की तरह लिखना ठीक नहीं होगा।

चांदी के भाव और बाजार के मौजूदा ट्रेंड को समझने के लिए हमारी Gold-Silver Price Analysis रिपोर्ट भी पढ़ सकते हैं।

कितनी चांदी की ज्वेलरी हॉलमार्क हो रही है?

BIS के आंकड़ों के मुताबिक FY 2024-25 में 32 लाख से ज्यादा silver jewellery articles hallmarked हुए थे। 2025-26 में यह संख्या बढ़कर करीब 59 लाख articles हो गई। इसका मतलब है कि भले ही सिल्वर हॉलमार्किंग अभी स्वैच्छिक है, लेकिन बाजार में इसका इस्तेमाल तेजी से बढ़ रहा है।

सीधी बात: हॉलमार्किंग बढ़ने का मतलब ग्राहक के लिए purity और traceability की जांच आसान होना है, जबकि कारोबारियों के लिए testing, record-keeping और compliance का महत्व बढ़ना तय है।
चांदी के भाव और मार्केट ट्रेंड: अगर आप चांदी के मौजूदा सपोर्ट और रेजिस्टेंस लेवल को समझना चाहते हैं, तो Gold Silver Market Outlook और Weekly Support-Resistance Analysis जरूर पढ़ें।

ज्वेलर्स और मैन्युफैक्चरर्स पर क्या असर पड़ेगा?

  • हॉलमार्क सिल्वर बेचने के लिए BIS registration और निर्धारित प्रक्रिया का पालन जरूरी है।
  • हॉलमार्किंग के लिए silver article को BIS-recognised Assaying & Hallmarking Centre में जांच के लिए भेजा जाता है।
  • हॉलमार्क लगे article की purity निर्धारित standard के अनुरूप होनी चाहिए।
  • आगे चलकर अगर mandatory hallmarking लागू होती है, तो बिना हॉलमार्क वाली चांदी की बिक्री पर compliance requirements बढ़ सकती हैं।
  • मैन्युफैक्चरर्स और ज्वेलर्स को invoice, purity और article details की documentation ज्यादा व्यवस्थित रखनी पड़ेगी।

ग्राहक चांदी खरीदते समय क्या देखे?

  • सिर्फ “925” या कोई purity number देखकर संतुष्ट न हों।
  • जहां applicable हो, BIS hallmark और HUID की जानकारी देखें।
  • हॉलमार्क वाले article की जानकारी BIS की आधिकारिक verification व्यवस्था से जांचें।
  • हमेशा proper bill/invoice लें और उसमें article की details, weight और purity दर्ज करवाएं।
  • महंगी चांदी की खरीद में शक होने पर recognised Assaying & Hallmarking Centre से purity testing कराना बेहतर है।

नकली चांदी पर लगाम कैसे लगेगी?

HUID व्यवस्था का सबसे बड़ा फायदा traceability है। किसी hallmarked silver article की पहचान डिजिटल रिकॉर्ड से जोड़ी जा सकती है। इससे सिर्फ “हॉलमार्क जैसा दिखने वाला निशान” लगाने के बजाय genuine hallmarking chain को ट्रैक करना आसान होता है।

इसके अलावा BIS बाजार से samples लेकर registered/certified jewellers और hallmarking centres की surveillance करता है। अगर hallmarked jewellery की वास्तविक purity उस पर लिखी purity से कम निकलती है, तो नियमों के तहत ग्राहक को compensation का प्रावधान भी है।

चांदी के कारोबारियों के लिए असली मतलब

देख भाई, इस पूरे मामले को सिर्फ “नकली गहनों पर कार्रवाई” समझना अधूरा होगा। असली खेल purity + testing infrastructure + digital traceability + compliance का है।

अगर BIS भविष्य में mandatory silver hallmarking लागू करता है तो छोटे-बड़े सभी कारोबारियों पर इसका असर पड़ेगा। खासकर ऐसे कारोबारियों को पहले से अपनी purity testing, product records, billing और BIS registration की व्यवस्था साफ रखनी चाहिए।

दूसरी तरफ ग्राहक के लिए यह अच्छी खबर है, क्योंकि चांदी महंगी होने के साथ purity की गलती का आर्थिक नुकसान भी बढ़ता है। हॉलमार्किंग और HUID का मजबूत सिस्टम बाजार में भरोसा बढ़ा सकता है।

फैक्ट चेक: “BIS ने चांदी की हॉलमार्किंग अभी से पूरे देश में अनिवार्य कर दी है” — यह दावा सही नहीं है। जून 2026 में BIS ने कहा था कि mandatory silver hallmarking के लिए framework और infrastructure पर अध्ययन चल रहा है और इसे चरणबद्ध तरीके से लागू करने की तैयारी है। कोई निश्चित nationwide launch date उस समय घोषित नहीं की गई थी।

निष्कर्ष

चांदी के बाजार में BIS की दिशा साफ दिखाई दे रही है—पहले HUID आधारित hallmarking, फिर testing infrastructure को मजबूत करना और उसके बाद जरूरत के हिसाब से mandatory hallmarking की तरफ बढ़ना। अभी कारोबारियों को घबराने की जरूरत नहीं है, लेकिन भविष्य के नियमों के लिए तैयार रहना समझदारी है।

ग्राहकों के लिए सीधी सलाह यही है कि महंगी चांदी खरीदते समय बिल लें, purity पूछें और जहां हॉलमार्क मौजूद हो वहां उसकी authenticity verify करें।

आधिकारिक और भरोसेमंद बाहरी स्रोत

नोट: यह रिपोर्ट उपलब्ध BIS, PIB और 4 जून 2026 की PTI-आधारित रिपोर्टों के आधार पर तैयार की गई है। नियमों में बदलाव होने पर आधिकारिक BIS आदेश को प्राथमिकता दें।

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📚 स्रोत और आधिकारिक जानकारी

इस रिपोर्ट को तैयार करने में BIS, PIB और PTI आधारित रिपोर्टों का इस्तेमाल किया गया है। नियमों और हॉलमार्किंग से जुड़ी जानकारी के लिए आधिकारिक BIS स्रोत को प्राथमिकता दें।

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⚠️ Disclaimer

इस लेख में दी गई जानकारी उपलब्ध BIS, PIB और समाचार रिपोर्टों के आधार पर सामान्य जानकारी के उद्देश्य से प्रस्तुत की गई है। हॉलमार्किंग, HUID, BIS नियम या चांदी की शुद्धता से जुड़े नियम समय के साथ बदल सकते हैं।

किसी भी खरीद-बिक्री या कारोबारी निर्णय से पहले संबंधित आधिकारिक BIS आदेश और वर्तमान नियमों की पुष्टि जरूर करें।

Shivam90.in किसी भी व्यक्ति को केवल इस लेख के आधार पर वित्तीय, कारोबारी या कानूनी निर्णय लेने की सलाह नहीं देता।