कमाई का नया रास्ता खुलने वाला है! REIT और InvIT में विदेशी पैसा लगाने की तैयारी

लेखक: शिवम सोनी | लोकेशन: नई दिल्ली | अपडेट: 21 अगस्त 2026, सुबह 11:00 बजे IST

REIT और InvIT में विदेशी निवेश की तैयारी, SEBI का नया प्रस्ताव
REIT और InvIT में विदेशी निवेश का रास्ता आसान करने की SEBI की तैयारी।

भारत में विदेशी पैसा लाने की नई तैयारी, REIT और InvIT में निवेश का रास्ता आसान करेगा SEBI

नई दिल्ली। भारत में विदेशी निवेश बढ़ाने के लिए अब रियल एस्टेट और इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़े निवेश का रास्ता और आसान करने की तैयारी चल रही है। SEBI ने विदेशी निवेशकों को भारतीय REITs और InvITs में निवेश करने की सुविधा देने का प्रस्ताव रखा है।

अगर यह प्रस्ताव अंतिम रूप लेता है तो विदेश में बैठा कोई निवेशक बिना भारतीय ट्रेडिंग अकाउंट खोले और भारत की घरेलू निपटान व्यवस्था से सीधे जुड़े बिना भारतीय REIT और InvIT में पैसा लगा सकेगा।

पहले समझिए REIT और InvIT क्या होते हैं

REIT यानी Real Estate Investment Trust। इसमें ऑफिस, शॉपिंग मॉल, गोदाम जैसी कमाई करने वाली व्यावसायिक संपत्तियों को एक ट्रस्ट के तहत रखा जाता है और उसका हिस्सा छोटे-छोटे यूनिट में निवेशकों को दिया जाता है।

वहीं InvIT यानी Infrastructure Investment Trust में सड़क, बिजली की ट्रांसमिशन लाइन, गैस पाइपलाइन जैसी इंफ्रास्ट्रक्चर संपत्तियां शामिल होती हैं।

इनका सबसे बड़ा आकर्षण नियमित नकदी प्रवाह है। SEBI के नियमों के मुताबिक वितरित किए जा सकने वाले नकदी प्रवाह का कम से कम 90% हिस्सा यूनिट धारकों को देना जरूरी है।

यानी निवेशक को सिर्फ शेयर की कीमत बढ़ने का इंतजार नहीं करना पड़ता, बल्कि संपत्ति से होने वाली कमाई का हिस्सा भी मिल सकता है।

REIT और InvIT का बाजार अब छोटा नहीं रहा

भारत में REIT और InvIT का कारोबार पिछले कुछ वर्षों में काफी बड़ा हो चुका है।

SEBI की रिपोर्ट के मुताबिक 31 मार्च 2026 तक REITs के पास करीब ₹2.38 लाख करोड़ की संपत्ति थी। वहीं InvITs के पास करीब ₹6.37 लाख करोड़ की संपत्ति थी।

दोनों को मिलाकर यह आंकड़ा लगभग ₹8.76 लाख करोड़ बैठता है।

वित्त वर्ष 2026 में REITs ने करीब ₹9,300 करोड़ और InvITs ने करीब ₹21,025.66 करोड़ जुटाए। यानी दोनों ने मिलकर एक साल में करीब ₹30,325.66 करोड़ जुटाए।

विदेशी निवेशकों के लिए क्या बदलेगा?

अभी किसी विदेशी निवेशक को भारतीय REIT या InvIT में निवेश करने के लिए भारत की कई प्रक्रियाओं से गुजरना पड़ता है। इसमें पंजीकरण, भारतीय ट्रेडिंग और निपटान व्यवस्था से जुड़ना तथा मुद्रा के लेनदेन जैसी चीजें शामिल हैं।

SEBI का प्रस्ताव इस प्रक्रिया को काफी आसान बनाने की कोशिश है।

प्रस्तावित व्यवस्था में REIT या InvIT की असली यूनिट भारत में कस्टोडियन के पास रहेंगी। इनके बदले Depository Receipt जारी की जाएगी, जिसका कारोबार विदेशी स्टॉक एक्सचेंज पर हो सकेगा।

सीधे शब्दों में कहें तो विदेश में बैठा निवेशक भारत में ऑफिस या सड़क की कमाई से जुड़े निवेश को विदेशी बाजार में खरीदे-बेचे जाने वाले सर्टिफिकेट के जरिए खरीद सकेगा।

भारत को विदेशी पैसा क्यों चाहिए?

इस समय भारत को लंबे समय के लिए बड़ी मात्रा में पूंजी की जरूरत है। 2026-27 के केंद्रीय बजट में सार्वजनिक पूंजीगत खर्च के लिए ₹12.2 लाख करोड़ का प्रावधान किया गया है।

बजट में इंफ्रास्ट्रक्चर की फंडिंग के लिए REITs, InvITs, National Investment and Infrastructure Fund और NaBFID का भी उल्लेख किया गया है।

सड़क और बिजली जैसी ऐसी संपत्तियां जो पहले से कमाई कर रही हैं, उनके जरिए पैसा जुटाकर आगे की नई परियोजनाओं में लगाया जा सकता है। इससे हर काम के लिए नया कर्ज लेने या कंपनी में नई हिस्सेदारी बेचने की जरूरत कम हो सकती है।

विदेशी फंडों को क्यों पसंद आ सकते हैं REIT और InvIT?

बड़े पेंशन फंड और बीमा कंपनियां ऐसी जगह पैसा लगाना चाहती हैं जहां लंबे समय तक नियमित आय मिलने की संभावना हो।

REIT और InvIT में पहले से चल रही संपत्तियां होती हैं। जैसे कोई तैयार ऑफिस बिल्डिंग या पहले से चल रहा टोल रोड। 90% वितरण वाला नियम भी ऐसे निवेशकों के लिए आकर्षण पैदा कर सकता है जिन्हें नियमित नकदी की जरूरत होती है।

लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि हर REIT या InvIT अच्छा निवेश है।

किसी ट्रस्ट पर कितना कर्ज है, किरायेदार या ग्राहक कितने मजबूत हैं, सड़क पर ट्रैफिक कितना है, लीज कितनी मजबूत है और प्रबंधन का रिकॉर्ड कैसा है—इन सब चीजों को देखना जरूरी है।

सबसे बड़ी चुनौती अभी बाकी है

SEBI ने यह प्रस्ताव 4 अगस्त 2026 को जारी किया है और इस पर 25 अगस्त 2026 तक लोगों से सुझाव मांगे गए हैं।

इसका मतलब अभी इसे अंतिम नियम नहीं माना जा सकता। विदेशी बाजारों में किन जगहों पर ऐसे Depository Receipts की अनुमति होगी और पूरी व्यवस्था किस तरह लागू होगी, इसकी अंतिम तस्वीर बाद में साफ होगी।

इसके अलावा रुपये की कीमत में उतार-चढ़ाव भी विदेशी निवेशकों के लिए बड़ा जोखिम है। विदेशी निवेशक डॉलर या दूसरी विदेशी मुद्रा में पैसा लगाता है, जबकि REIT और InvIT से मिलने वाली रकम रुपये में होती है। अगर रुपया कमजोर होता है तो विदेशी निवेशक के अंतिम रिटर्न पर असर पड़ सकता है।

बाजार में खरीद-बिक्री की क्षमता यानी लिक्विडिटी भी महत्वपूर्ण रहेगी। बड़े विदेशी फंडों को पैसा लगाते समय और निकालते समय पर्याप्त खरीदार-विक्रेता चाहिए होते हैं।

क्या इससे REIT और InvIT में तेजी आएगी?

SEBI का प्रस्ताव विदेशी निवेश का रास्ता आसान जरूर कर सकता है, लेकिन इससे तुरंत बड़ी मात्रा में विदेशी पैसा आ जाएगा, ऐसा कहना अभी जल्दबाजी होगी।

भारत में REIT और InvIT का बाजार पहले ही काफी बड़ा हो चुका है और कुछ विदेशी निवेशक इनमें पहले से पैसा लगा रहे हैं। नए नियम का असली फायदा यह हो सकता है कि जो विदेशी निवेशक मौजूदा प्रक्रिया की वजह से दूर रह रहे हैं, उनके लिए भारतीय बाजार में प्रवेश करना आसान हो जाए।

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निष्कर्ष

SEBI का यह प्रस्ताव भारत के REIT और InvIT बाजार के लिए महत्वपूर्ण कदम हो सकता है। इससे विदेशी निवेशकों के लिए भारतीय रियल एस्टेट और इंफ्रास्ट्रक्चर में पैसा लगाना आसान हो सकता है।

हालांकि, अभी यह सिर्फ प्रस्ताव है, अंतिम नियम नहीं। इसलिए निवेशकों को किसी भी REIT या InvIT में पैसा लगाने से पहले उसकी संपत्ति, कर्ज, नकदी प्रवाह, वितरण इतिहास और प्रबंधन की स्थिति जरूर देखनी चाहिए।

डिस्क्लेमर: यह जानकारी उपलब्ध लेख के आधार पर तैयार की गई है। इसे निवेश सलाह न माना जाए। किसी भी निवेश का फैसला लेने से पहले खुद रिसर्च करें।

शिवम सोनी

शिवम सोनी News Shivam90.in के लेखक और संपादक हैं। वे बिजनेस, बाजार, सोना-चांदी, सरकारी योजनाओं और देश-दुनिया से जुड़ी महत्वपूर्ण खबरों को सरल और आसान भाषा में पाठकों तक पहुंचाते हैं।