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" विश्वाश की शक्ति "
इंसान के जीवन मैं उतार चढ़ाव तो आते जाते रहते है। सुख और दुख कपड़ों की तरह है एक ही कपड़ा हमेशा नहीं पहना जा सकता।उसी यह अगर आज सुख है तो हमेशा बना रहेगा यह संभव नहीं है। दुख आज के सुख के पीछे ही लाइन में लगा रहता है। और अगर दुख है तो हमेशा रहेगा ए भी संभव नहीं है। जीवन मैं कोई भी दुख इतना बड़ा भी नहीं होता की उसे पराजित न किया जा सके।इंसान अपार शक्तियों का स्वामी है। शक्तियों के सामर्थ के आगे कोई दुख और विपत्ति टिक ही नहीं सकती। सुरक्षित रहना ही मानव शक्ति का स्वभाव है। वास्तविक रूप मै देखा जाए तो शक्ति और कोई नहीं इंसान के हृदय मै बैठा परमात्मा ही है। इंसान को चाहिए कि सुख मै नियम संयम और धर्म का पालन करे और दुख मैं धैर्यवान बना रहे। हमारा हृदय हमे हर वक्त पर सुगम मार्ग पर चलने के लिए प्रेरित करता रहता है। हृदय को हमेशा अटल विश्वास रहता है। जो हो रहा है बो नियति का विधान है । परमात्मा हमारी बुद्धि की सृजन शक्ति है । देखा जाए तो मानव विश्वास ही है कि पंछियों को उड़ते देख वायुयान और मछली को पानी के अंदर देख पनडुब्बी का निर्माण किया गया।
लोगों का तो ए भी मानना है कि मकड़ी के जाल को देख गूगल का निर्माण किया गया। अपने देखा ही होगा कि मकड़ी कैसे अपना जाल जीग़ जैग करके बनाती है एक के ऊपर एक जाल बुनती जाती है। और एक दिन कोई मकड़ा आता है जाल काट देता है।मकड़ी कही नहीं भाग पाती उलझ जाती है। ठीक वैसे ही इंसान उलझा पड़ा है।खुद की सुध भूल के कही और कही और उलझता जाता है।
फिर एक दिन हार के अपना विश्वास खो देता है। हमारे मन का विश्वास ही बुद्धि और ज्ञान को एक आधार प्रदान करता है। वास्तव मै हृदय मै बैठा परमात्मा ही हम सब को शक्ति प्रदान करता है। इंसान के चेतन और अवचेतन मन को को प्रभावित करता है। परमात्मा के संकेत हमेशा प्राप्त होते रहते है। हमारा मन और बुद्धि दोनों ही अज्ञान के कोहरे मै दबे हुए रहते है। इस लिए हमें परमात्मा के संकेत का अनुभव ही नहीं होता। इंसान अगर हृदय के संकेत को सुनता और समझता रहे तो कभी भ्रम मै नहीं पड़ेगा। बस यही विश्वास ही उसकी शक्ति है। इस शक्ती से ही कठिन से कठिन समय भी आसानी से कट जाएगा। परमात्मा की शक्ति ही हमारा अटल सत्य है। और हमारा विश्वास है।।
Shivamsoni .......