इंटरनेशनल फंड्स में निवेश कितना सही? जानिए एक्सपर्ट की पूरी सलाह, कितना रखें Allocation?
क्या भारतीय निवेशकों को विदेश में निवेश करना चाहिए?
आज के समय में सिर्फ भारतीय मार्केट में निवेश करना ही पर्याप्त नहीं माना जा रहा। तेजी से बदलती ग्लोबल इकॉनमी, डॉलर की मजबूती और विदेशी कंपनियों की ग्रोथ को देखते हुए अब इंटरनेशनल फंड्स भी निवेशकों के पोर्टफोलियो का हिस्सा बन रहे हैं।
फाइनेंशियल एक्सपर्ट प्रबलीन वाजपेयी के अनुसार हर निवेशक को अपने पोर्टफोलियो का कुछ हिस्सा विदेशी बाजारों में जरूर रखना चाहिए। इसका सबसे बड़ा फायदा Diversification यानी जोखिम को अलग-अलग मार्केट में बांटना होता है।
इंटरनेशनल फंड्स क्या होते हैं?
इंटरनेशनल फंड्स ऐसे म्यूचुअल फंड होते हैं जो भारत के बाहर की कंपनियों या मार्केट्स में निवेश करते हैं। उदाहरण के तौर पर:
- US Market Funds (S&P 500, Nasdaq)
- Taiwan Technology Funds
- Global Innovation Funds
- Emerging Markets Funds
इन फंड्स के जरिए भारतीय निवेशक Apple, Microsoft, Nvidia, Tesla जैसी विदेशी कंपनियों में अप्रत्यक्ष निवेश कर सकते हैं।
रुपये की कमजोरी कैसे देती है फायदा?
अगर डॉलर मजबूत होता है और रुपया कमजोर होता है, तो विदेशी निवेश का फायदा बढ़ जाता है।
उदाहरण के लिए:
अगर किसी US Fund ने 0% रिटर्न दिया लेकिन उसी दौरान रुपया डॉलर के मुकाबले 5% कमजोर हो गया, तो भारतीय निवेशक को लगभग 5% का फायदा केवल Currency Movement से मिल सकता है।
पिछले 10 वर्षों में रुपये में लगभग 35% तक गिरावट देखने को मिली है। यही कारण है कि कई एक्सपर्ट इंटरनेशनल एक्सपोजर को जरूरी मानते हैं।
विदेश में निवेश करने के तरीके
1. International Mutual Funds
भारत की AMC कंपनियों के जरिए विदेशी फंड्स में निवेश।
2. Direct International Brokerage
ICICI Securities, HDFC Securities, Axis Direct जैसे प्लेटफॉर्म विदेशी शेयरों में निवेश की सुविधा देते हैं।
3. Fintech Platforms
Vested, INDmoney जैसे ऐप्स के जरिए US Stocks में निवेश किया जा सकता है।
4. GIFT City Route
GIFT City के जरिए डॉलर आधारित निवेश के नए विकल्प तेजी से लोकप्रिय हो रहे हैं।
टैक्सेशन कैसे लगता है?
अगर इंटरनेशनल निवेश 2 साल से ज्यादा रखा जाता है तो Long Term Capital Gains Tax लगभग 12.5% लागू हो सकता है।
2 साल से पहले बेचने पर Short Term Capital Gains लागू होगा जो आपकी टैक्स स्लैब के अनुसार हो सकता है।
इसके अलावा LRS (Liberalised Remittance Scheme) के तहत विदेश पैसा भेजने पर TCS भी लागू हो सकता है।
पोर्टफोलियो में कितना Allocation सही?
एक्सपर्ट के अनुसार:
- Minimum Allocation: 5%
- Ideal Allocation: 10% से 20%
हालांकि निवेशक की उम्र, जोखिम क्षमता, आय और लक्ष्य के अनुसार यह बदल सकता है।
कौन सी गलती नहीं करनी चाहिए?
अभी US और कई विदेशी बाजार अपने हाई लेवल्स के आसपास ट्रेड कर रहे हैं। ऐसे में सिर्फ रिटर्न देखकर निवेश करना जोखिम भरा हो सकता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि SIP और Diversification Strategy के जरिए धीरे-धीरे निवेश करना ज्यादा सुरक्षित तरीका हो सकता है।
लंबी अवधि में SIP की ताकत
अगर कोई निवेशक हर महीने ₹10,000 SIP करे और हर साल 10% Step-Up बढ़ाए, तो 20 वर्षों में करोड़ों का फंड तैयार हो सकता है।
यानी सिर्फ हाई रिटर्न खोजने से ज्यादा जरूरी है:
- Discipline
- Long Term Investing
- Step-Up SIP
- Diversification
निष्कर्ष
इंटरनेशनल फंड्स अब सिर्फ अमीर निवेशकों का विकल्प नहीं रहे। धीरे-धीरे भारतीय निवेशकों के पोर्टफोलियो में भी विदेशी एक्सपोजर बढ़ रहा है।
लेकिन बिना समझे सिर्फ ट्रेंड देखकर निवेश करना सही नहीं माना जाता। सही Allocation, लंबी अवधि और संतुलित रणनीति के साथ ही विदेशी निवेश फायदे का सौदा बन सकता है।
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