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Shivam Soni

Founder – News Shivam90 | MCX Gold Silver Analysis | Global News

सरल भाषा में बाजार और देश दुनिया की खबरों का विश्लेषण।

"शॉकिंग! अब चांदी पर भी होगी हॉलमार्किंग, ग्राहकों के लिए बड़ा बदलाव"

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अब चांदी पर भी होगी हॉलमार्किंग: ग्राहकों को मिलेगा असली-नकली की पहचान का आसान तरीका

नई दिल्ली। भारतीय बाजार में सोने के बाद अब चांदी पर भी हॉलमार्किंग अनिवार्य कर दी गई है। केंद्र सरकार ने यह फैसला ग्राहकों की सुरक्षा और धंधे में पारदर्शिता बढ़ाने के लिए लिया है। अब जो भी चांदी के गहने या बर्तन बिकेंगे, उन पर BIS (Bureau of Indian Standards) की हॉलमार्किंग जरूरी होगी। इस कदम से जहां ग्राहकों को शुद्धता की गारंटी मिलेगी, वहीं चांदी का कारोबार करने वालों को भी लंबे समय में फायदा होगा।

"अब चांदी पर भी होगी हॉलमार्किंग:"

क्या है हॉलमार्किंग?

हॉलमार्किंग एक सरकारी प्रमाणन प्रणाली है, जिसके तहत किसी धातु की शुद्धता की जांच की जाती है। अब तक यह केवल सोने पर लागू थी, लेकिन अब चांदी के आभूषण और बर्तनों पर भी यह जरूरी कर दी गई है। इसका मतलब यह है कि बाजार में मिलने वाली चांदी पर एक खास फाइननेस नंबर लिखा होगा, जिससे उसकी शुद्धता की पहचान हो सकेगी।

चांदी की शुद्धता कैसे पहचानी जाएगी?

सोने की तरह चांदी में कैरेट नहीं बल्कि फाइननेस नंबर होता है। उदाहरण के लिए –

  • 925 का मतलब है 92.5% शुद्ध चांदी।
  • 900 का मतलब है 90% शुद्ध चांदी।
  • 800 का मतलब है 80% शुद्ध चांदी।

इस नंबर को देखकर कोई भी ग्राहक असली-नकली चांदी की पहचान कर सकता है।

ग्राहकों को क्या फायदा होगा?

अब ग्राहकों को यह डर नहीं रहेगा कि उन्हें नकली या कम शुद्धता वाली चांदी मिल रही है। हॉलमार्किंग के बाद –

  • चांदी की शुद्धता की गारंटी मिलेगी।
  • नकली और मिलावटी चांदी से बचाव होगा।
  • चांदी बेचते समय उसकी रीसेल वैल्यू बेहतर मिलेगी।

ज्वेलर्स और कारोबारियों के लिए क्या बदलेगा?

ज्वेलर्स और चांदी का कारोबार करने वालों को अब BIS लाइसेंस लेना पड़ेगा और हर आभूषण/बर्तन को हॉलमार्किंग कराना होगा। नियमों का उल्लंघन करने पर जुर्माना और कानूनी कार्रवाई हो सकती है। हालांकि इससे कारोबारियों को लंबे समय में लाभ ही होगा, क्योंकि ग्राहक का भरोसा बढ़ेगा और अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी भारतीय चांदी की मांग में इजाफा होगा।

कब से लागू होंगे नियम?

सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि निर्धारित तारीख से बिना हॉलमार्किंग वाली चांदी बेचना अपराध माना जाएगा। फिलहाल BIS की ओर से देशभर में हॉलमार्किंग केंद्रों की संख्या तेजी से बढ़ाई जा रही है ताकि ज्वेलर्स आसानी से अपने उत्पाद प्रमाणित करा सकें।

आम आदमी की जेब पर असर

चांदी पर हॉलमार्किंग लागू होने से इसकी कीमतों पर बहुत बड़ा फर्क नहीं पड़ेगा। हां, थोड़ी-बहुत सर्टिफिकेशन फीस जुड़ सकती है, लेकिन इसके बदले ग्राहकों को भरोसेमंद और शुद्ध चांदी मिलेगी।

निष्कर्ष

सरकार का यह फैसला लंबे समय में ग्राहकों और कारोबारियों दोनों के लिए फायदेमंद साबित होगा। एक तरफ ग्राहकों को असली-नकली की पहचान आसान होगी, वहीं दूसरी ओर भारत का सिल्वर बिजनेस भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मजबूती पाएगा। अब चांदी खरीदते समय ग्राहक सिर्फ डिजाइन ही नहीं बल्कि हॉलमार्किंग पर भी ध्यान देंगे।

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