रिसर्च : 20 साल में तलाक के केस 50% बढ़े, 58% केस में महिलाएं कर रहीं पहल... शादी के 3 साल में सबसे ज्यादा रिश्ते टूट रहे
नई दिल्ली। देश में पिछले दो दशकों में तलाक के मामलों में तेज़ बढ़ोतरी दर्ज की गई है। रिसर्च रिपोर्ट के अनुसार पिछले 20 वर्षों में तलाक के केस लगभग 50% तक बढ़े हैं। चौंकाने वाली बात यह है कि 58% मामलों में महिलाएं खुद पहल कर रही हैं। आंकड़े यह भी बताते हैं कि शादी के शुरुआती तीन साल सबसे संवेदनशील साबित हो रहे हैं।
कौन ले रहा? औसतन 31 वर्ष की महिलाएं और 36 के पुरुष
- निजी सर्वे एजेंसियों के अनुसार शहरी क्षेत्रों में तलाक दर तेजी से बढ़ी है।
- महिलाओं की औसत उम्र 30-32 वर्ष और पुरुषों की 35-38 वर्ष पाई गई।
- शिक्षा और आर्थिक आत्मनिर्भरता ने महिलाओं को निर्णय लेने में सक्षम बनाया।
- पारिवारिक दबाव, करियर टकराव और लाइफस्टाइल अंतर प्रमुख कारण बन रहे हैं।
रिपोर्ट के अनुसार मेट्रो शहरों में पिछले तीन सालों में तलाक के मामलों में लगभग तीन गुना वृद्धि देखी गई है। दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु और पुणे जैसे शहर इस सूची में ऊपर हैं।
क्यों ले रहे? 23% मामलों में क्रूरता, 14% में घरेलू हिंसा
| कारण | प्रतिशत |
| आपसी सहमति | 33% |
| क्रूरता | 23% |
| घरेलू हिंसा | 14% |
| लगातार झगड़े | 11% |
| व्यभिचार | 6% |
| अन्य कारण | 13% |
विशेषज्ञों का कहना है कि मानसिक असंतुलन, संवाद की कमी और सोशल मीडिया से बढ़ती तुलना भी रिश्तों को कमजोर कर रही है।
कहां ज्यादा? महाराष्ट्र शीर्ष पर
| राज्य | तलाक दर |
| महाराष्ट्र | 18.7% |
| कर्नाटक | 11.7% |
| पश्चिम बंगाल | 8.2% |
| दिल्ली | 7.7% |
| तमिलनाडु | 7.1% |
मेट्रो शहरों में आर्थिक स्वतंत्रता और व्यक्तिगत प्राथमिकताओं के बदलते स्वरूप को प्रमुख वजह माना जा रहा है।
कब ले रहे? शादी के 3 साल में सबसे ज्यादा टूट रहे रिश्ते
- करीब 40% तलाक के मामले शादी के पहले तीन साल के भीतर सामने आ रहे हैं।
- 25 से 34 वर्ष आयु वर्ग में तलाक के मामले सबसे अधिक हैं।
- जनवरी, मई और सितंबर में तलाक याचिकाओं की संख्या अधिक पाई गई।
- कोर्ट प्रक्रिया की अनिवार्य 6 महीने की प्रतीक्षा अवधि को भी कई मामलों में घटाया गया है।
सामाजिक विश्लेषकों का मानना है कि आधुनिक रिश्तों में अपेक्षाएं पहले से अधिक हैं, लेकिन सहनशीलता कम हो गई है। इसी कारण शुरुआती वर्षों में ही मतभेद बढ़ जाते हैं।
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स्रोत: पारिवारिक अदालतों के आंकड़े, कानूनी अध्ययन रिपोर्ट (2017-2024), सामाजिक शोध संस्थान विश्लेषण।
