Delhi Liquor Scam Verdict: कोर्ट ने ED-CBI पर उठाए सवाल, कहा – “बिना पुख्ता सबूत कैसे बनाया केस?” केजरीवाल-सिसोदिया बरी
नई दिल्ली: दिल्ली की राजनीति को झकझोर देने वाले कथित शराब नीति मामले में राउज एवेन्यू कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाते हुए अरविंद केजरीवाल और मनीष सिसोदिया को आरोपों से बरी कर दिया। कोर्ट ने अपने आदेश में साफ कहा कि अभियोजन पक्ष आरोपों को साबित करने के लिए ठोस और विश्वसनीय सबूत पेश करने में असफल रहा। अदालत की इस टिप्पणी ने न केवल केस की दिशा बदल दी, बल्कि जांच एजेंसियों की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े कर दिए।
⚖️ कोर्ट की कड़ी टिप्पणी – “आरोप गंभीर हैं, पर सबूत कहाँ हैं?”
विशेष जज ने अपने आदेश में कहा कि किसी भी आपराधिक मुकदमे में आरोपों की गंभीरता से ज्यादा महत्वपूर्ण होता है सबूतों की गुणवत्ता। अदालत ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि “केवल कथित साजिश का नैरेटिव गढ़ देना पर्याप्त नहीं है, अदालत ठोस दस्तावेजी और परिस्थितिजन्य साक्ष्य मांगती है।”
कोर्ट ने यह भी कहा कि चार्जशीट में कई दावे ऐसे थे जिनका आपसी तार्किक संबंध अदालत में स्थापित नहीं किया जा सका। जज ने टिप्पणी की कि यदि साक्ष्य श्रृंखला (chain of evidence) पूरी न हो तो अदालत दोष सिद्ध नहीं मान सकती।
🔎 ED और CBI की जांच पर उठे सवाल
फैसले के दौरान अदालत ने अप्रत्यक्ष रूप से यह संकेत दिया कि जांच एजेंसियों को आरोप लगाने से पहले सबूतों की मजबूती सुनिश्चित करनी चाहिए। कोर्ट ने कहा कि “बिना स्पष्ट वित्तीय लेनदेन, बिना प्रत्यक्ष लाभ के प्रमाण और बिना ठोस गवाह के बयान के केवल अनुमान के आधार पर साजिश साबित नहीं की जा सकती।”
इस टिप्पणी को राजनीतिक गलियारों में जांच एजेंसियों पर सवाल के रूप में देखा जा रहा है। हालांकि अदालत ने एजेंसियों की नीयत पर टिप्पणी नहीं की, लेकिन यह जरूर कहा कि प्रस्तुत सामग्री दोष सिद्ध करने के मानक पर खरी नहीं उतरती।
📜 पूरा मामला क्या था?
यह केस 2021-22 की दिल्ली आबकारी नीति से जुड़ा था। आरोप था कि नई नीति के तहत लाइसेंस वितरण में अनियमितता हुई और कुछ निजी कंपनियों को अनुचित लाभ मिला। जांच एजेंसियों का दावा था कि नीति के जरिए कथित रूप से आर्थिक लाभ पहुंचाया गया।
हालांकि अदालत ने पाया कि नीति बनाने की प्रक्रिया में आपराधिक साजिश के स्पष्ट प्रमाण नहीं मिले। कोर्ट ने कहा कि “नीति का निर्णय यदि बाद में विवादित साबित हो जाए तो भी वह स्वतः आपराधिक साजिश नहीं बन जाता।”
😭 फैसले के बाद भावुक दिखे केजरीवाल
फैसला सुनाए जाने के बाद अरविंद केजरीवाल कोर्ट परिसर से बाहर निकलते समय भावुक नजर आए। उन्होंने समर्थकों का धन्यवाद किया और कहा कि “सच को परेशान किया जा सकता है, लेकिन हराया नहीं जा सकता।” मनीष सिसोदिया ने भी कहा कि न्याय व्यवस्था पर उनका भरोसा और मजबूत हुआ है।
📊 केस की टाइमलाइन
- नवंबर 2021: नई आबकारी नीति लागू।
- जुलाई 2022: विवाद के बाद CBI जांच शुरू।
- 2022-23: कई नेताओं पर आरोप और पूछताछ।
- फरवरी 2026: राउज एवेन्यू कोर्ट ने आरोपमुक्त किया।
🏛️ राजनीतिक असर क्या होगा?
इस फैसले का असर केवल कानूनी नहीं बल्कि राजनीतिक भी माना जा रहा है। आम आदमी पार्टी इसे अपनी नैतिक जीत बता रही है, जबकि विपक्ष का कहना है कि जांच अभी खत्म नहीं हुई है। यदि जांच एजेंसियां उच्च न्यायालय में अपील करती हैं तो मामला आगे बढ़ सकता है।
विश्लेषकों का मानना है कि यह फैसला आने वाले चुनावी समीकरणों को प्रभावित कर सकता है। क्योंकि यह केस लंबे समय से राष्ट्रीय राजनीति का केंद्र बना हुआ था।
📌 निष्कर्ष
राउज एवेन्यू कोर्ट के इस फैसले ने एक बात साफ कर दी है — भारतीय न्याय व्यवस्था में आरोपों से ज्यादा महत्व सबूतों का है। अदालत ने यह स्पष्ट किया कि बिना पुख्ता साक्ष्य के किसी भी व्यक्ति को दोषी नहीं ठहराया जा सकता।
अब निगाहें इस बात पर होंगी कि क्या जांच एजेंसियां इस फैसले को उच्च न्यायालय में चुनौती देती हैं या नहीं। फिलहाल, केजरीवाल और सिसोदिया को बड़ी राहत मिली है और दिल्ली की राजनीति में एक नया अध्याय शुरू हो गया है।
Disclaimer: यह रिपोर्ट सार्वजनिक न्यायालयीय आदेश, उपलब्ध दस्तावेजों और विश्वसनीय मीडिया स्रोतों के आधार पर तैयार की गई है। अंतिम और आधिकारिक आदेश वही मान्य होगा जो संबंधित न्यायालय द्वारा प्रकाशित किया गया है।
