बीजिंग में ट्रंप की ‘इंटरनेशनल बेइज्जती’ ? चीन दौरे में बॉडी लैंग्वेज ने खड़े किए बड़े सवाल
🕒 Updated: 14 May 2026 | 07:45 PM IST
✍️ Author: Shivam Soni | News Shivam90.in
दुनिया की राजनीति में इस समय एक ऐसी तस्वीर सामने आई है जिसने वैश्विक ताकतों के बदलते संतुलन पर नई बहस छेड़ दी है। जिस डोनाल्ड ट्रंप ने कभी चीन को अमेरिका का सबसे बड़ा दुश्मन बताया था, जिस ट्रंप ने चीनी प्रोडक्ट्स पर भारीभरकम टैरिफ लगाए थे, वही ट्रंप अब बीजिंग में काफी बदले हुए अंदाज में नजर आए।
बीजिंग पहुंचते ही ट्रंप की बॉडी लैंग्वेज पर सवाल उठने लगे। एयरपोर्ट पर ना तो चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग स्वागत के लिए पहुंचे और ना ही कोई बड़ा भव्य स्वागत दिखाई दिया। स्वागत की औपचारिकताएं बेहद कम समय में पूरी कर दी गईं। ट्रंप के चेहरे की शिकन और हावभाव देखकर कई लोगों ने कहा कि शायद उन्हें भी इस ठंडे स्वागत की उम्मीद नहीं थी।
इसके बाद जब ट्रंप शी जिनपिंग से मिलने पहुंचे तो उनकी चाल, चेहरे के भाव और हर मूवमेंट चर्चा का विषय बन गया। कार से उतरते समय ट्रंप थोड़ा असहज दिखाई दिए। पहले उन्होंने अपना सूट ठीक किया, फिर कार का सहारा लेते हुए आगे बढ़ते नजर आए। कई मौकों पर वो नीचे देखते दिखाई दिए, मानो अंदर से दबाव महसूस कर रहे हों।
जब ट्रंप ने जिनपिंग की तरफ हाथ बढ़ाया तो शी जिनपिंग अपनी जगह पर ही खड़े रहे। ट्रंप ने हाथ मिलाने के बाद जिनपिंग का हाथ देर तक पकड़े रखा और कई बार थपथपाते भी नजर आए। सोशल मीडिया पर लोग इस पल को बार-बार शेयर कर रहे हैं और अलग-अलग मतलब निकाल रहे हैं।
बैठक के दौरान भी कई तस्वीरों में शी जिनपिंग काफी शांत और आत्मविश्वास में दिखाई दिए जबकि ट्रंप अपेक्षाकृत दबाव में नजर आए। यही वजह है कि अंतरराष्ट्रीय मीडिया में यह चर्चा तेज हो गई कि क्या दुनिया का पावर सेंटर अब धीरे-धीरे बदल रहा है।
मामला यहीं नहीं रुका। बैठक के दौरान शी जिनपिंग ने ताइवान मुद्दे पर अमेरिका को साफ संदेश दिया। उन्होंने कहा कि ताइवान ऐसा मुद्दा है जो दोनों देशों के बीच बड़ा टकराव पैदा कर सकता है और इससे चीन-अमेरिका संबंध बेहद खतरनाक स्थिति में पहुंच सकते हैं।
दिलचस्प बात यह रही कि ताइवान पर सवाल पूछे जाने पर ट्रंप ज्यादा आक्रामक प्रतिक्रिया देने से बचते दिखाई दिए। यही कारण है कि कई राजनीतिक विश्लेषक इसे ट्रंप के बदले हुए रवैये के रूप में देख रहे हैं।
हालांकि राजनीति में कोई स्थायी दोस्त या दुश्मन नहीं होता, लेकिन बीजिंग से आई इन तस्वीरों ने दुनिया में नई बहस जरूर छेड़ दी है। कोई इसे कूटनीतिक रणनीति बता रहा है तो कोई ट्रंप की कमजोर होती वैश्विक पकड़।

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