चांदी ₹2,90,000 प्रति किलो: भाव ऊँचा है, परेशानी नीचे की है!
आज का चांदी भाव: 16 जनवरी 2026 को भारत में चांदी का भाव लगभग ₹2,90,000 प्रति किलो के आसपास चल रहा है। स्क्रीन पर भाव रिकॉर्ड बना रहा है, लेकिन ज़मीनी हकीकत इससे बिल्कुल उलटी है। सराफा बाजार, ज्वैलरी कारीगर और छोटे व्यापारी इस तेज़ी से खुश नहीं, बल्कि परेशान हैं।
भाव ऊँचा है, लेकिन काम ठप क्यों?
आज चांदी का भाव भले ही ₹2.9 लाख छू रहा हो, लेकिन ज्वैलरी मार्केट में ग्राहक नहीं हैं। दुकानों में ऑर्डर रुके हुए हैं, कारीगर खाली बैठे हैं और माल उठाने वाला कोई नहीं। असली दिक्कत भाव का ऊँचा होना नहीं, बल्कि रोज़ाना 10–20 हजार की तेज़ी-मंदी है, जो व्यापार करने ही नहीं देती।
सुबह माल लिया, शाम तक भाव गिर गया। शाम को दिया, रात में भाव बढ़ गया। इस उथल-पुथल ने व्यापारी की कमर तोड़ दी है।
ऑनलाइन खरीद बनाम असली चांदी
चांदी का लाइव भाव (MCX आधारित)
नोट: यह भाव MCX आधारित लाइव मार्केट मूवमेंट दिखाता है। ज्वैलरी/सराफा भाव शहर अनुसार अलग हो सकते हैं।
आज चांदी की ज़्यादातर खरीद ऑनलाइन और काग़ज़ पर हो रही है – MCX, फ्यूचर्स, सट्टा। लेकिन असली चांदी की मांग, यानी ज्वैलरी और सराफा में, हालत बहुत खराब है।
यही कारण है कि भाव स्क्रीन पर तो भाग रहा है, लेकिन बाजार में ठहर नहीं पा रहा। जब नीचे भाव आता है तो सप्लाई रुक जाती है, और ऊपर भाव जाता है तो माल महँगा हो जाता है। दोनों तरफ दुकानदार फँस जाता है।
व्यापारियों के लिए एक अपनी समझ से समाधान
इस हालात में समझदार चांदी व्यापारी अब नया रास्ता पकड़ रहे हैं – चांदी की रीसाइक्लिंग और चांदी प्रोडक्शन।
अगर बाजार से पुरानी चांदी की ज्वैलरी या चांदी का स्क्रैप उपलब्ध हो जाता है, और उसे अपनी यूनिट में रिसाइकिल किया जाए, तो व्यापारी रोज़ की तेज़ी–मंदी से काफी हद तक बच सकता है।
रिसाइक्लिंग के दौरान कुछ निखिल,kdm ,जस्ता , तांबा (लॉस) निकलना सामान्य बात है, लेकिन इसके बाद तैयार की गई चांदी की बयार की मांग बाजार में हमेशा बनी रहती है। नुकसान सीधी गलाई से बचाया भी जा सकता है!
चांदी की बयार का सबसे बड़ा फायदा यह है कि यह नगद में आसानी से बिक जाती है, हालांकि व्यापार 1% मजदूरी मै हो रहा है जिससे व्यापारी को न तो लंबे उधार की चिंता रहती है और न ही भाव के अचानक बदलने का डर।
जरूरी है कि कच्ची चांदी मार्केट मै घूमे!
इस मॉडल में चांदी व्यापारी को बार-बार भाव देखने की जरूरत नहीं पड़ती। चांदी घर में रहती है, काम चलता रहता है और कैश फ्लो बना रहता है।
इसी वजह से मौजूदा समय में चांदी के व्यापार में रीसाइक्लिंग और प्रोडक्शन को सबसे सुरक्षित और व्यवहारिक समाधान माना जा सकता है।
जिसके पास मशीन है, लेबर है और काम आता है – वही आज सुरक्षित है।
सरकार क्या करे तो बाजार स्थिर हो?
अगर सरकार या एक्सचेंज ये नियम लगा दे कि 1 किलो चांदी खरीदने के लिए पूरा पैसा पहले जमा करना होगा, तो 80% सट्टा अपने आप खत्म हो जाएगा।
भाव अचानक नहीं उछलेंगे, रोज़ की 10–20 हजार की मार रुकेगी और असली व्यापार को सांस मिलेगी।
निष्कर्ष
चांदी ₹5 लाख भी जाए तो दिक्कत नहीं, लेकिन अगर रोज़ का उतार-चढ़ाव नहीं रुका तो ज्वैलरी और सराफा व्यापार खत्म हो जाएगा।
आज जो व्यापारी भाव छोड़कर प्रोडक्शन, रीसाइक्लिंग और कैश फ्लो पर काम कर रहा है, वही आगे टिकेगा।
भाव स्क्रीन पर बनता है, लेकिन व्यापार भट्टी में चलता है।
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Author: Shivam Soni
Source: News Shivam90.in
Disclaimer: यह जानकारी जनहित में है।


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