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क्या PM मोदी को दिख गया आने वाला बड़ा संकट? आखिर क्यों बोले- अभी सोना मत खरीदो

📍 Location: नई दिल्ली, India
🕒 Last Updated: 16 May 2026 | 08:12 PM IST
✍️ Author: Shivam Soni | News Shivam90

PM मोदी की सोना ना खरीदने की अपील के बाद भारत के गोल्ड रिजर्व, मंदिरों के सोने और अर्थव्यवस्था पर बड़ा विश्लेषण


विपक्ष पीएम मोदी के हर फैसले पर सवाल उठा देता है और कई बार तो विपक्ष को रिएक्ट करने में 1 घंटा भी नहीं लगता। जबकि पीएम मोदी के साथ ऐसा नहीं है। नरेंद्र मोदी कोई फैसला या अपील करने से पहले उसके बारे में सोचते हैं, समझते हैं। फिर उसके बाद सही वक्त पर फैसला लेते हैं। चाहे उसमें कई घंटे लग जाए, कई दिन लग जाए कोई फर्क नहीं पड़ता है। 
लेकिन एक बार सोच समझ कर ही मोदी फैसला करते। पीएम मोदी कोई अपील या फैसला करने से पहले उसका कंप्लीट होमवर्क भी करते हैं और जब पीएम को भरोसा हो जाता है कि उनके उस फैसले या अपील से देश का भला होगा। देश के 140 करोड़ जनता का फायदा होगा तो उसके बाद ही वह उस फैसले पर मुहर लगाते हैं। 11 मई से ही देश की ज्वेलरी इंडस्ट्री में भूचाल आया हुआ है। मोदी विरोधियों के द्वारा यह बातें फैलाई जा रही हैं कि पीएम मोदी ने बिना सोचे समझे यह सोना ना खरीदने की अपील कर। कई सराफा संगठन भी कह रहे हैं कि पीएम मोदी को यह अपील करने से पहले कम से कम उनसे तो बात कर लेनी चाहिए थी क्योंकि ज्वेलरी इंडस्ट्री कोई छोटी-मोटी इंडस्ट्री नहीं है। इससे करीब 50 लाख लोगों की रोजी रोटी जुड़ी हुई है। आप समझिए कि पीएम मोदी की अपील के बाद सर्राफा कारोबारियों के चेहरे उतर गए हैं। बड़े-बड़े ज्वेलरी शोरूम के मालिक माथा पकड़ कर बैठ गए हैं कि एक साल तक वो कैसे सर्वाइव करेंगे। लेकिन सिक्के का दूसरा पहलू भी है। पीएम मोदी ने जन भागीदारी की जिस उम्मीद के साथ देश के 140 करोड़ लोगों से सोना ना खरीदने की अपील की उस उम्मीद को कायम रखने के लिए अगर लोग मोदी का साथ देना शुरू करें तो क्या ही गजब हो जाए। आज का यह डिटेल आपको दिखाऊंगा कि कैसे देश की तस्वीर और तकदीर बदल सकती है पीएम मोदी की इस अपील के बाद। हमारे घरों में महिलाओं के करीब 50% जीवर हमेशा तिजोरी में ही बंद रहते हैं और वह तभी निकलते हैं जब शादी ब्याह जैसा कोई खास मौका आता है। तो सोचिए कि अगर हम परिवार जिसमें सोना आपके पास जमा है हर परिवार अपना गैर जरूरी सोना ब्याज पर सरकार को दे दे तो क्या होगा? इसका कितना बड़ा असर देश पर पड़ेगा? कैसे रातोंरात भारत की किस्मत सोने की तरह चमकने लगेगी? आज ये आपको बता और इसी तरह अगर देश के सभी बड़े मंदिर अपनी तिजोरियों में रखे हजारों टन सोना सरकार को दे दे तो कमाल हो जाएगा। यह भी आज आपको बताने वाला हूं कि क्या-क्या कमाल हो सकता है। आज आपको यह भी बताऊंगा कि यूएई में जहां सोने की कोई खदान तक नहीं है। वो देश सोने का दूसरा सबसे बड़ा ट्रेड कैसे कर रहा है? सबसे बड़ा ट्रेडर कैसे बन गया? जब सोने के रेट से दुनिया में हाय तौबा मची हुई है। तब चीन दबाकर सोना क्यों खरीद रहा है? चांदी का क्या हाल है? क्या चांदी के रेट अभी भी कम नहीं होंगे? साथ ही बात होगी पीएम की पेट्रोल वाली अपील की भी। लोग ईवी और पब्लिक ट्रांसपोर्ट का मैक्सिमम इस्तेमाल शुरू कर दें तो भारत को कितना फायदा होने लगेगा यह सब आज आपको बताने वाला हूं। लेकिन पहले ये ट्रेलर जब तक हालात सामान्य ना हो हम सोने की खरीद को टाले गोल्ड की जरूरत नहीं है। जहां संभव हो पेट्रोल डीजल का उपयोग कम करें। 11 मई को पीएम मोदी ने देश की जनता से सोना ना खरीदने की अपील की और उसके दो दिन के बाद यानी कि 13 मई को सोने पर भारीभरकम इंपोर्ट ड्यूटी बढ़ा दी गई ताकि जो सोना पहले से महंगा है वह और महंगा हो जाए। पीएम मोदी ने क्या सोच कर किया यह आगे आज आपको बताने वाला हूं। लेकिन अभी देखिए कि सोने पर इंपोर्ट ड्यूटी बढ़ते ही सीएमएक्स यानी कि मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज में सोने के दाम कहां से कहां पहुंचे। मोदी सरकार ने सोने और चांदी पर इंपोर्ट टेरिफ 6% से बढ़ाकर 15% कर दिया। जिसके बाद सोना चांदी की कीमत और ज्यादा बढ़ गई। मतलब जो सोना 150000 से 155000 के बीच में ट्रेड कर रहा था उसके भाव तुरंत ₹1600 प्रति 10 ग्राम पहुंच गए। आज सुबह एमसीएक्स में 10 ग्राम सोने का दाम ₹162758 था और 1 किलो चांदी का दाम ₹298432 था। यानी मोदी सरकार के इंपोर्ट ड्यूटी बढ़ाने से सोना एक बार में ही करीब ₹10,000 महंगा हो गया। आमतौर पर संकट के दौरान सरकारें समस्याओं को खुलकर नहीं बताती। बड़े संकट को भी सरकारें बहुत हल्का करके बताती है ताकि लोगों में पैनिकिक ना फैले, अफवाह ना फैले और सिचुएशन अंडर कंट्रोल रहे, अनकंट्रोल ना हो जाए। लेकिन इस बार पीएम ने किसी संकट की वजह से सोना ना खरीदने की अपील नहीं की है। बल्कि उन्होंने यह अपील एतियातन की है। यानी कि संकट आने से पहले ही सरकार जन भागीदारी के जरिए उससे निपटने की तैयारी कर रही है। और वो तैयारी है कि विदेशी मुद्रा भंडार को खर्च होने से बचाया जाए। कैसे उसको बचा कर रखा जाए। लेकिन मोदी की अपील का असर क्या हुआ है? यह आपको दिखाता हूं। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक बहुत सारे लोगों ने पीएम की अपील का उल्टा मतलब निकाल लिया। लोगों को लगा कि अभी तो पीएम मोदी अपील कर रहे हैं। कहीं बाद में सोने के दाम बढ़ गए या सरकार ने इंपोर्टेड ड्यूटी बढ़ा दी तो क्या हो जाएगा? इसलिए देश के कई हिस्सों में सोने की पैनिकिक बाइंग शुरू हो गई। आप देखिए कि मोदी की अपील के बाद पिछले दो दिनों में ब्राइडल ज्वेलरी की बिक्री में 15% से 20% की तेजी आ गई। जिनके घरों में 4 से छ महीने बाद शादी होने वाली थी, उन्होंने पैनिकिक में आकर अभी से गहने खरीदने शुरू कर दिए। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक ज्वेलरी के बड़े शोरूम ने 25 लाख से ज्यादा का सोना बेच दिया है। जबकि मिड साइज की ज्वेलरी शॉप्स में 15 लाख से ₹18 लाख तक का सोना सेल किया जा चुका है। मुंबई के मशहूर ज्वेलरी बाजार में भी सोने की बिक्री 20% बढ़ गई है। ओवरऑल देखें तो पूरे देश में पिछले 2 महीने में सोने के गहनों की खरीद 20% तक बढ़ गई है। मुंबई, दिल्ली, कोलकाता, चेन्नई, बेंगलुरु जैसे जो बड़े शहर हैं उसमें पैनिकिक बाइंग देखने को मिली और इस दौरान हैवी ब्राइडल सेट्स की डिमांड सबसे ज्यादा हो गई कि भाई 2 महीने 4 महीने बाद शादी होने वाली है घर में तो पता नहीं क्या होगा अभी खरीद के रख लें। क्योंकि परंपरा के हिसाब से और जो सिस्टम कस्टम है उस कस्टम के हिसाब से आपको मजबूरन वो गहना देना ही पड़ता है। आपको देखना ही पड़ता है कि गहना हम अपने शादी ब्याह समारोह में एक दूसरे को देंगे ही। इसलिए लोगों ने खरीदना शुरू कर दिया अभी। मतलब लोगों ने पैनिकिक में आकर सोने के गहने खूब खरीदे। खासकर शादी ब्याह वाले जो परिवार हैं। हालांकि एक्सपर्ट्स का कहना है कि पीएम मोदी की अपील लंबे समय तक मानी गई तो सोने की डिमांड कम हो सकती है। कहा जाता है कि हमारे देश के मंदिरों और घरों में हजारों टन सोना पड़ा हुआ है। वैसे तो यह सोना किसी काम का नहीं है। बस रखा हुआ है। अगर इसका सही इस्तेमाल किया जाए तो क्या हो जाएगा? वो आपको बताने वाला हूं। पहले देखिए कि हमारे देश के बड़े-बड़े मंदिरों और घरों में कुल अनुमानित गोल्ड रिजर्व 500 टन है और इन सोने के भंडार का बड़ा हिस्सा भारत की अर्थव्यवस्था से बाहर है क्योंकि वो उसमें आते ही नहीं शामिल ही नहीं है। वो सरकारी खजाने में नहीं गिने जाते हैं। वो मंदिर के खजाने में गिने जाते। लेकिन मान लीजिए कि अगर पीएम की अपील पर देश के बड़े-बड़े मंदिर अपने खजाने में रखा हुआ सोना भारत सरकार को एक स्कीम के तहत दे दें जिससे उन मंदिरों की कमाई भी और भारत को सोना बाहर से खरीदना भी ना पड़े। तो आप सोचिए क्या हो जाएगा? क्या-क्या हो सकता है? आप ध्यान से देखते रहिए। बता रहा हूं कि क्या-क्या हो सकता है। देश कहां से कहां पहुंच जाएगा? अमेरिका कहां रह जाएगा? चीन कहां छूट जाएगा? अभी भारत का गोल्ड रिजर्व 880 टन है। 880 टन और केरल के पद्मनाम स्वामी मंदिर, तिरुपति बालाजी मंदिर और वैष्णो देवी धाम जैसे जो बड़े मंदिर हैं जानते हैं उनका कुल सोना उनके पास कितना है? करीब 4000 टन यह अनुमान है सिर्फ हो सकता है इससे ज्यादा हो अगर सरकार को यह सारा सोना मिल जाए यानी कि सरकारी खजाने में सारा सोना आ जाए तो भारत का गोल्ड रिजर्व 5000 टन के आसपास हो जाए जोड़ दीजिए आप कि 880 टन और उसके बाद जोड़िए कि अगर जो मंदिरों में जो अनुमान लगाया जा रहा है कि करीब 4000 टन मंदिरों में सोना पड़ा हुआ है वो दोनों अगर मिल जाएंगे तो 5000 टन नहीं हो जाएगा। अब सोचिए कि क्या हो सकता है। अभी देखते रहिए। यानी कि भारत का गोल्ड रिजर्व चार से पांच गुना एकदम से बढ़ जाएगा। अचानक से बढ़ जाएगा और भारत दुनिया के टॉप गोल्ड होल्डिंग देशों में शामिल हो जाएगा। यानी कि भारत उन देशों में शामिल हो जाएगा जिनके पास सबसे ज्यादा सोना रिजर्व में है। अभी अमेरिका के पास सबसे ज्यादा गोल्ड रिजर्व है। 8000 टन से ज्यादा। इसके अलावा देखिए कि क्या फायदा होगा। भारत हर साल 700 से 800 टन सोना इंपोर्ट करता है। लेकिन मंदिरों से सोना मिलने के बाद भारत को कम से कम 4 से 5 साल के लिए सोना इंपोर्ट करने की जरूरत ही नहीं पड़ेगी। क्योंकि रिजर्व इतना होगा तो बाहर से सोना क्यों खरीदेंगे? और बाहर से सोना नहीं खरीदेंगे तो डॉलर भी नहीं देना होगा। अब इसका इंपैक्ट क्या-क्या होगा यह भी आज आपको बताने वाला हूं। लेकिन भारतीय रुपया भी 3 से 8% तक मजबूत हो जाएगा। क्योंकि गोल्ड का रिजर्व बढ़ेगा। इसकी एक अहम भूमिका होती है रुपया के कमजोर और मजबूत होने में। तो अनुमान लगाया जा रहा है कि 3 से 8% तक रुपया हमारी करेंसी जो है वो मजबूत हो सकता है। अगर मंदिरों ने साथ दिया तो भारत को 4 से 5 सालों में 300 से 400 बिलियन डॉलर की बचत हो सकती है। और शायद यही पीएम मोदी का गोल भी है। अब आप समझ रहे हैं कि पीएम मोदी ने जो अपील की है वो क्यों की है? भाई कोई सोच रहा था, कोई देख रहा था कि क्या होने वाला है। लेकिन लोग कहते हैं ना प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लिए कि दूर की बातों को समझते हैं, जानते हैं। इसीलिए पहले से प्लान करने लग जाते हैं। सबसे बड़ी बात है कि भारत सोने के मामले में चार से पांच साल के लिए ही सही लेकिन आत्मनिर्भर बन जाएगा। यानी भारत को विदेशों से सोना मंगाना नहीं पड़ेगा। लेकिन देश के बड़े-बड़े मंदिरों के ट्रस्ट सरकार को सोना दे देंगे। यह होना इसलिए बड़ा मुश्किल है क्योंकि भारत आस्था का देश है। मंदिर के कण-कण से लोग आस्था रखते हैं। तो सोचिए अगर मंदिरों से मिले सोने को सरकार पिघलाकर अपने काम में लेना शुरू करेगी तो लोग चुप नहीं रहेंगे और इसका भारी विरोध हो सकता है। क्योंकि सनातनियों का एक बड़ा तबका मंदिरों को दान में मिले आभूषण को ईश्वर की संपत्ति मानता है। मंदिरों में कितना सोना पड़ा हुआ है और उससे कैसी काया पलट हो सकती है यह तो पता आपको चल गया। लेकिन क्या आपको यह पता है कि हमारे देश में जहां हर घर की महिलाएं सोने के गहने पहनती हैं, शादी ब्याह में लाखों के गहनों से दुल्हन को सजा दिया जाता है। उस देश के घरों में कितना सोना तिजोरियों में धूल फाक रहा है। आपको अंदाजा भी नहीं होगा कि आपकी दादी, नानी, मम्मी, चाची, बुआ सब ने कितना सोना रखा हुआ है। आप यह जानकर हैरान हो जाएंगे कि भारत के घरों में पड़े गैर जरूरी सोने के गहनों को एक जगह जमा किया जाए अगर तो यह दुनिया का सबसे बड़ा दुनिया का सबसे बड़ा प्राइवेट गोल्ड होल्डिंग स्टॉक बन सकता है। वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल की एक रिपोर्ट है जिसके मुताबिक भारतीय परिवारों के पास कुल 25,000 से 35,000 टन सोना मौजूद है। मंदिरों में मौजूद है 4000 के आसपास। सरकार के पास 880 और जो हमारे आपके घर परिवार में मौजूद है जो सिर्फ तिजोरी में आप रखते हैं या बैंक के लॉकर में रख लेते हैं। जरूरत पड़ने पर कभी उसको निकाल कर पहन लेते हैं शादी ब्याह में या बैंक के लॉकर में तो पड़ा ही रहता है। देखने भी नहीं जाते हैं। उसको अगर काउंट कर लिया जाए तो कुल मिलाकर 25,000 से 35,000 टन सोना मौजूद है हमारे पास। मतलब यह हमारे और आपके घर में भारत के घरों में रखे सोने की कुल कीमत 5 ट्रिलियन डॉलर से ज्यादा है। यह रकम देश की जो सालाना जीडीपी है उससे भी ज्यादा है। हमारे देश की हर महिला को यह जानकर गर्व होगा कि अकेले भारतीय महिलाओं के पास दुनिया के कुल सोने का भंडार का लगभग 11% स्टॉक है। आपने कभी उस पर ना सोचा होगा ना विचार किया होगा कि आपके पास जो सोने के गहने पड़े हुए हैं जो आपकी सास ने दिए हैं जो आपकी मां ने दिए हैं आपकी चाची ने दिए हैं या आपने रखा हुआ है जो पुश्तैनी रखा हुआ है वो सब अगर उसका अगर एवरेज निकाल देंगे तो हमारे देश की महिलाएं सबसे ज्यादा अमीर हैं भाई। हमारे आपके घरों में पड़ा कुल सोना आरबीआई के गोल्ड रिजर्व से करीब 40 गुना ज्यादा है। मतलब गरीब है आरबीआई भी। हमारे घर की जो महिलाएं हैं उनके सामने आरबीआई अगर सोने के लिहाज से देखें तो गरीब है। अगर हर परिवार अपनी तिजोरी में रखा गैर जरूरी सोना जो कि 10 से 20% ही अगर मान लिया जाए वो अगर सरकार को ब्याज पर दे दे तो भारत का गोल्ड रिजर्व चार से आठ गुना और बढ़ जाएगा। यानी कि भारत का गोल्ड रिजर्व 880 टन से बढ़कर करीब 8000 टन हो सकता है। यानी कि अमेरिका के गोल्ड रिजर्व के बराबर हो जाए। और अगर लोग अपने घरों का 50% गैर जरूरी सोना सरकार के पास जमा कर दें तो भारत दुनिया के टॉप थ्री गोल्ड होल्डिंग देशों में शामिल हो जाए। अब सोचिए कि क्या चमत्कार कर सकते हैं आप। अगर जिस दिन आप चाह लें कि देश को सोने की तरह चमकाना है और आपने कमर बांध ली, तैयारी कर ली और सरकार की इस स्कीम में आप शामिल हो जाते हैं तो सोचिए कि देश कहां से कहां पहुंच जाए। आप जरूर सोच रहे होंगे कि अगर ऐसा है तो सरकार को ऐसी कोई स्कीम ले आनी चाहिए थी जिससे कि लोग अपना सोना सरकार को रेंट पर दे देते और सरकार को उससे देश की अर्थव्यवस्था सुधारने का मौका भी मिल जाता, मदद भी मिल जाती। तो आपको एक बात बता देता हूं। शायद आपको पता हो कि नहीं पता हो। आप इतनी नजर रखते हैं कि नहीं रखते हैं। लेकिन मोदी सरकार ऐसी एक स्कीम 2015 में ही लेकर आ गई थी। यानी कि 2014 में मोदी की सरकार बनी और एक साल के भीतर ही मोदी ये स्कीम लेकर आ गए थे। आज हम लोग 2026 में खड़े हैं। 11 साल पहले लेकर आई थी सरकार एक स्कीम। सरकार ने जीएमएस यानी कि गोल्ड मोनेटाइजेशन स्कीम लांच की थी। लेकिन लोगों ने इस स्कीम में बहुत दिलचस्पी नहीं दिखाई। आप देखिए कि 2015 से अब तक सिर्फ 39 टन सोना लोगों ने जमा किया है इस स्कीम के तहत। लोगों को यह डर रहता है कि उनके गहने सरकार के पास अगर चले जाएंगे तो वो पिघला सकती है और गहनों के रूप में उनके पुरखों की जो विरासत है वो खत्म हो जाएगी। नहीं रहता है कि दादी कहती है कि नहीं नहीं नहीं नहीं हम नहीं देंगे। वो हमारी पुतपुतऊ होगी उसके लिए रखे हुए हैं। नतनी की जो शादी होगी उसमें देंगे। होता है ना आपके घर में भी होता होगा। तो उनको डर रहता है कि अगर सोना निकल जाएगा घर से सरकार के पास जमा कर देंगे तो सरकार क्या कर लेगी क्या पता और इसी डर को दूर करने के लिए सरकार ने 2025 में इस स्कीम में बदलाव भी कर दिया था भाई लेकिन फिर भी रिजल्ट वो नहीं मिला जो सरकार चाह रही थी। पीएम मोदी ने लोगों को सोना खरीदने से इसलिए मना किया है क्योंकि भारत को अपनी खपत का 99% सोना विदेशों से खरीदना पड़ता है। यानी आप जो सोना और सोने के गहने खरीदते हैं वह विदेशी सोना ही होता है। उसे पहले सरकार खरीद कर भारत लाती है। फिर ज्वेलरी कंपनियों के जरिए वो आपके घर तक पहुंचती है। और सोना जो आप पहनते हैं वो ज्वेलरी की जो शॉप्स जहां पर आप जाते हैं वो लोग उसको बनाते हैं। मेकिंग चार्ज देते हैं। आपको दे देते हैं। आप घर लेकर चले जाते हैं। फिर सोचते हैं कि अब आपने कभी देखा है कि कभी आपके घर का जो सोना है जरूरत पड़ने पर भी कभी आप निकालते हैं। बहुत ज्यादा जरूरत पड़ मतलब कोई उपाय ही नहीं है। अब घर में खाने के लिए खाना ही नहीं है। इलाज के लिए पैसा ही नहीं है। बेचने के लिए जमीन भी नहीं है। तब जाकर लोग सोना घर से निकालते हैं। नहीं तो सोना पड़ा रहता है। कई पुष्पों का सोना पड़ा हुआ होगा आपके घर में। आपके बच्चों को पता भी नहीं होगा। लेकिन ये देश के लिए कितना फायदेमंद हो सकता है? आज आपको बता रहा हूं। भारत अपना सबसे ज्यादा सोना स्विट्जरलैंड से खरीदता है। उसके बाद यूएई से उसके बाद यूएई जो देश है इसीलिए आपको बता रहा था मैं कि कैसे दूसरा सबसे बड़ा ट्रेडर हो गया वो बताऊंगा अभी आपको। लेकिन समझिए कि यूएई से भारत सोना खरीद रहा है। लेकिन यूएई एक ऐसा देश है जहां पर सोने की खदानें ही नहीं है। मतलब वहां कोई ऐसा खदान नहीं है जहां सोना निकल रहा है। फिर भी यह देश सोने की इंटरनेशनल मंडी बना हुआ है। सबसे बड़ा हब बना हुआ है। सबसे बड़ा बाजार बना हुआ है। सोने के कारोबार में यूएई दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा फिजिकल गोल्ड ट्रेडिंग हब बना हुआ है। जबकि पहले नंबर पर स्विट्जरलैंड आता है। 2024 में यूएई ने 170 बिलियन डॉलर के सोने का ट्रेड किया। यूएई मुख्य रूप से रॉ गोल्ड यानी कि कच्चा सोना आयात करता है। इसके बाद यूएई में उस रॉ गोल्ड को रिफाइन करके जेवर बनाए जाते हैं। 2024 में यूएई ने अफ्रीका से सबसे ज्यादा 748 टन सोना आयात किया था और इसी साल यूएई कुल 13392 टन सोना इंपोर्ट करके दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा गोल्ड इंपोर्टर भी बन गया। यूएई के सोने का सबसे बड़ा कस्टमर भारत ही है और इसीलिए यूएई के शहर दुबई को सिटी ऑफ गोल्ड भी कहा जाता है। टैक्स फ्री पॉलिसी, ज्योग्राफी, लोकेशन, इंफ्रास्ट्रक्चर और डीएमसीसी की वजह से दुबई आज ग्लोबल गोल्ड का क्रॉस रोड बन गया है। पीएम मोदी की अपील और इंपोर्ट ड्यूटी बढ़ाने के बाद आशंका जताई जा रही है कि अब भारत में सोने की बिक्री कम हो जाएगी। लेकिन आप देखिए कि भारत में सोना सिर्फ निवेश नहीं है बल्कि उससे भी कहीं बढ़कर आभूषण परंपरा और बुरे वक्त में काम आने वाली संपत्ति मानी जाती है और ये एक इमोशन है। ये जो सोने के गहने आप खरीद कर ले जाते हैं ना ये इमोशन हो जाता है। बेटे को देना है, बेटी को देना है, बहू को देना है, पोते को देना है, इमोशनल है ये। और इसीलिए लोग अपना गहना घर में एक बार खरीदने के बाद उसे निकालते नहीं। चाहे वो पड़ा ही रह जाए। शादी हो, ब्याह हो, त्यौहार, परंपरा, निवेश में गोल्ड की अहम भूमिका रहती है। इसलिए देश में हर साल करीब 700 से 800 टन सोना खपत हो जाता है। भाई अभी कुछ महीने बाद धनतेरस आने वाला है। आप देखिएगा कि मार्केट में कितनी भीड़ रहती है। आपको पता ही होगा। वहां सोना खरीदने के लिए इतना महंगा सोना खरीदने के लिए लोग लाइन में लगे रहते हैं। बिल बनवाने के लिए लंबी-लंबी दो-द घंटे की लाइन लगती है। तब सोने की सबसे ज्यादा खरीदारी होती है और सबसे ज्यादा लोग इसे खरीदने के लिए बाजार में निकलते हैं। लेकिन इस बार देखना होगा कि लोग धनतेरस पर सोना खरीदते हैं या फिर पीएम की अपील मानकर मेड इन इंडिया प्रोडक्ट्स का रुख करते।

📌 Source Box

✅ RBI Gold Reserve Reports ✅ World Gold Council Data ✅ MCX Gold & Silver Market Rates ✅ Ministry of Finance Notifications ✅ Gold Monetization Scheme (GMS) Documents ✅ UAE Gold Trade & Import Reports ✅ International Bullion Market Data ✅ Media Reports & Bullion Analysts ✅ Dubai Multi Commodities Centre (DMCC) Reports ✅ Global Commodity Market Trends
Disclaimer:
यह लेख बाजार रिपोर्ट्स, आर्थिक आंकड़ों, मीडिया इनपुट और सार्वजनिक स्रोतों पर आधारित विश्लेषण है। इसमें बताए गए कुछ आंकड़े अनुमानित या विभिन्न रिपोर्ट्स पर आधारित हो सकते हैं। निवेश या सोना-चांदी खरीदने से पहले अपने वित्तीय सलाहकार से सलाह जरूर लें।

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